विपरीत परिस्थितियों में थोड़ा मुरझा सकता है भारत, लेकिन मर नहीं सकता', ऐसा क्यों बोले pm मोदी
नई दिल्ली। prime minister narendra modi news : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज वीडियो कॉन्फेंसिंग से श्री अरबिंदो की 150वीं जयंती के मौके पर स्मारक सिक्का और डाक टिकट जारी किया। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को अमर बीज बताते हुए कहा कि ‘हमारा देश विपरीत से विपरीत परिस्थितियों में थोड़ा दब सकता है, थोड़ा मुरझा सकता है, लेकिन वो मर नहीं सकता, क्योंकि भारत मानव सभ्यता का सबसे परिष्कृत विचार है, मानवता का सबसे स्वाभाविक स्वर है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि 15 अगस्त 1872 को पैदा हुए श्री अरबिंदो एक दूरदर्शी व्यक्ति थे, जिन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान दिया था।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज पूरे देश का युवा भाषा के आधार पर भेदभाव करने वाली राजनीति को पीछे छोड़कर 'एक भारत और श्रेष्ठ भारत' से प्रेरित है। इसके साथ PM मोदी ने कहा कि 'महार्षि अरबिंदो के जीवन को अगर पास से देखेंगे तो उसमें भारत की आत्मा और भारत की विकास यात्रा दिखाई देगी।'
अरबिंदो के जीवन में आधुनिक शोध भी था, राजनीतिक प्रतिशोध भी था और ब्रम्हा बोध भी था। उन्होंने देश की आजादी के लिए बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कांग्रेस की अंग्रेजपरस्त नीतियों की खुलकर अलोचना की।
PM मोदी ने कहा कि अरबिंदो ने कहा था कि 'अगर हम अपने देश का फिर से निर्माण चाहते हैं तो हमें रोते हुए बच्चे की तरह ब्रिटिश पार्लियामेंट के आगे गिड़गिड़ाना बंद करना होगा।'(भाषा)
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि 15 अगस्त 1872 को पैदा हुए श्री अरबिंदो एक दूरदर्शी व्यक्ति थे, जिन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान दिया था।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज पूरे देश का युवा भाषा के आधार पर भेदभाव करने वाली राजनीति को पीछे छोड़कर 'एक भारत और श्रेष्ठ भारत' से प्रेरित है। इसके साथ PM मोदी ने कहा कि 'महार्षि अरबिंदो के जीवन को अगर पास से देखेंगे तो उसमें भारत की आत्मा और भारत की विकास यात्रा दिखाई देगी।'
अरबिंदो के जीवन में आधुनिक शोध भी था, राजनीतिक प्रतिशोध भी था और ब्रम्हा बोध भी था। उन्होंने देश की आजादी के लिए बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कांग्रेस की अंग्रेजपरस्त नीतियों की खुलकर अलोचना की।
PM मोदी ने कहा कि अरबिंदो ने कहा था कि 'अगर हम अपने देश का फिर से निर्माण चाहते हैं तो हमें रोते हुए बच्चे की तरह ब्रिटिश पार्लियामेंट के आगे गिड़गिड़ाना बंद करना होगा।'(भाषा)