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Author: Upsc Online

नदियाँ या नदी अपवाह तंत्र तथा बहुउद्देश्यीय नदी घाटी परियोजनाएं

भूगोल विषय का यह एक महत्त्वपूर्ण अध्याय है। इसकी प्रतियोगितात्मक महत्ता भी अधिक है। अतः विस्तार और गहराई से अध्ययन अपेक्षित है।

नदी या नदी अपवाह तंत्र की परिभाषा- वर्षा का जल जब धरातल में किसी न किसी रुप में बहने लगता है तो उसे "बाही जल" कहते हैं। यह बाही जल उच्च स्थलीय क्षेत्रों से निम्न स्थलीय क्षेत्रों की ओर ढाल के अनुरुप गुरुत्वाकर्षण के कारण बहने लगता है तो नदी कहलाता है। नदियों के विभिन्न क्रमों, अर्थात् मुख्य, सहायक, उप-सहायक, शाखाओं-प्रशाखाओं से युक्त तन्त्र को नदी अपवाह तन्त्र कहते हैं।

नदियों की उत्पत्ति पठारी, पहाड़ी एवं पर्वतीय क्षेत्रों में छोटी-छोटी अवनलिकाओं के रुप में होती है, जिसे भूगोल की भाषा में "गुली" कहते हैं। नदियों का उद्देश्य- चरम स्तर, अर्थात् बेस लेबल को प्राप्त करना होता है।

अपने उद्देश्य की प्राप्ति तक नदियाँ अनवरत सक्रिय रहती हैं और 3 कार्य करती हैं- अपरदन यानी इरोज़नए परिवहन यानी ट्रांसपोर्टेशनए तथा निक्षेप यानी डिपोज़ीशन।

नदियाँ तीन प्रकार की आकृतियों का निर्माण करती हैं- (नं. 1) गार्ज या कैनियन, (नं. 2) विषर्प या गोखुर झील अर्थात् मियाण्डर या ऑक्स.बो.लेक तथा (नं. 3) डेल्टा या एश्चुअरी।

अब हम विश्व की कुछ प्रमुख नदियों के बारे में जानकारी प्राप्त करें-

1. नील नदी- यह विश्व की सबसे लम्बी नदी है। इसकी लम्बाई 6670 किलोमीटर है। यह अफ्रीका महाद्वीप में प्रवाहित होती है। इसका उद्गम दो स्थानों से होता है। एक शाखा इथोपिया स्थित अबीसीनिया के पठार से टाना झील के पास से उद्गमित होती है। इसे ब्ल्यू नील कहते हैं। दूसरी शाखा विक्टोरिया झील से निकलती है। इसे व्हाइट नील कहते हैं। विक्टोरिया झील अफ्रीका की सबसे बड़ी झील है। यह तंजानिया, केन्या और युगाण्डा की सीमा पर स्थित है। ब्ल्यू नील और व्हाइट नील उत्तर दिशा की ओर प्रवाहित होती हुई सूडान की राजधानी खार्तूम में आकर परस्पर मिल जाती हैं और एकाकार होकर उत्तर दिशा की ओर नील नदी के नाम से प्रवाहित होती हैं। नील नदी मिस्र के परिक्षेत्र में, पोर्ट सईद के पश्चिम की ओर भू.मध्य सागर में विलीन होती है।

उल्लेखनीय है कि (नं. 1) नील नदी का मिस्र की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान है, इसलिए इसे "मिस्र का वरदान" कहते हैं। (नं. 2) 1951 मीटर लम्बा अस्वान बाँध इसी नदी पर मिस्र में निर्मित किया गया है, जिसके ऊपरी घाटी में 111 मीटर ऊँचा अस्वान उच्च बाँध निर्मित किया गया है, जहाँ नासिर झील के जल को बाँधकर जल का उपयोग सिंचाई एवं ऊर्जा उत्पादन के लिए किया जाता है। (नं. 3) नील नदी पोर्ट सईद के पश्चिम में भू­मध्य सागर में विलीन होती है। पोर्ट सईद "स्वेज नहर" के उत्तरी सिरे पर स्थित मिस्र का बन्दरगाह है। (नं. 4) स्वेज नहर, जो कि विश्व की व्यस्ततम् जहाजी नहर है, पोर्ट स्वेज और पोर्ट सईद को जोड़ती है। ये दोनों मिस्र के बन्दरगाह हैं, जिनमें पोर्ट स्वेज लाल सागर के तट पर तथा पोर्ट सईद भू­मध्य सागर के तट पर स्थित है। (नं. 5) स्वेज एक स्थल सन्धि यानी इस्थूमस थी, जो अफ्रीका महाद्वीप और एशिया महाद्वीप को जोड़ती थी तथा भू­मध्य सागर और लाल सागर को पृथक करती थी। यह स्थल सन्धि मिस्र के सिनाई प्रायद्वीप में स्थित थी। इसे ही काटकर स्वेज नहर बनाई गयी है।

2. आमेजन नदी- यह दक्षिण अमेरिका महाद्वीप में प्रवाहित होती है। यह विश्व की सबसे बड़ी नदी मानी जाती है। कारण यह कि इसकी गहराई, चैड़ाई, अपवाह क्षेत्र और जल का आयतन नील नदी से अधिक है। इस पर वर्षा का कालिक वितरण सर्वश्रेष्ठ है और इसीलिए जल­राशि का आयतन अधिक है। इसकी लम्बाई नील नदी से कम है। अर्थात् नील नदी की लम्बाई 6670 किलोमीटर और आमेजन नदी की लम्बाई 6450 किलोमीटर है।

आमेजन नदी पेरू के पठार पर स्थित "ग्रेट फ्लड झील" से निकलती है और ब्राजील के परिक्षेत्र में अटलांटिक महासागर में विलीन होती है। इस नदी का अपवाह क्षेत्र दक्षिण अमेरिका महाद्वीप के करीब 40 प्रतिशत भू­भाग को आप्लावित करता है, किन्तु मुख्य प्रवाह क्षेत्र ब्राजील में है। अर्थात् इसके अपवाह क्षेत्र में ब्राजील के अलावां पेरू, इक्वाडोर, बोलीबिया, वेनेजुएला, सूरीनाम, गुयाना आदि देशों के भू­भाग आते हैं।

आमेजन बेसिन में अत्यन्त सघन वर्षा वन यानी रेनी फॉरेस्ट फैले हुए हैं, जो धरती पर आक्सीजन उत्पादन के सबसे समृद्ध वन हैं। इसीलिए आमेजन बेसिन को "पृथ्वी का फेफड़ा" यानी ‘लंग्स ऑफ दी अर्थ’ कहते हैं।

  1. 6300 किलोमीटर है। यह जर्मनी की राइन नदी के बाद विश्व की सर्वाधिक व्यस्त नदी है। यह तिब्बत के पठार से निकलती है और पूरब की ओर प्रवाहित होती हुई पूर्वी चीन सागर में विलीन होती है। इस नदी ने अपनी बेसिन में लाल मिट्टी का निक्षेप किया है, जिससे इसकी बेसिन को "रेड बेसिन" कहते हैं। यह नदी चीन की अर्थव्यवस्था में अहम योगदान देती है। इस नदी के किनारे बहुत सारे इन्डस्ट्रियल नगर बसे हुए हैं, जिनके द्वारा उत्पादित मटेरियल नौपरिवहन के माध्यम से सीधे इस नदी द्वारा शंघाई पोर्ट तक लाया जाता है, जिससे ट्रान्सपोर्टेशन खर्च कम आता है। इस नदी के किनारे बसे नगरों में ‘वुहान’. आयरन ऐण्ड स्टील, ‘नानजिंग’. टेक्सटाइल, आयरन ऐण्ड स्टील, ‘चेंगदू’. आयल ऐण्ड गैस, ‘सिचुआन बेसिन’. राइस कल्टीवेशन के लिए प्रसिद्ध हैं। इन शहरों से यांग टि सिक्यांग नदी द्वारा जलपरिवहन के माध्यम से सीधे शंघाई पोर्ट तक सामानों को पहुँचाया जाता है। परिणामतः परिवहन खर्च कम होता है। चाइना ने विद्युत उत्पादन के लिए ‘थ्री गॉर्ज डैम’ तथा यांग्त्सी और ह्वांग हो नदी को जोड़ने वाली ‘यून्हो’ नामक कैनाल भी बनाया हुआ है।
  2. 6020 किलोमीटर है। यह नदी भी नील की भाँति दो नदियों का संयुक्त प्रवाह है। उनमें मिसौरी उत्तरी अमेरिका के मोंटाना राज्य के दक्षिणी राकी पर्वत से निकलकर दक्षिण की तरफ प्रवाहित होते हुए सेन्ट लुई शहर के पास मिसीसिपी नदी के साथ संगम बनाती है। सेन्ट लुई नगर में वायुयान निर्माण, लौह स्पात उद्योग एवं तेल शोधक कारखानें हैं। जबकि मिसीसिपी कनाडा-यू.एस.ए. के बार्डर रीजन से निकलकर दक्षिण दिशा की ओर प्रवाहित होते हुए, सेन्ट लुई नगर में मिसौरी के साथ संगम बनाने के बाद प्रवाहित होते हुए न्यू आर्लियन्स बन्दरगाह के पास मेक्सिको की खाड़ी में डेल्टा बनाकर विलीन हो जाती है।

अरकन्सास, यलो स्टोन, केन्टुकी, ओहियो, टेनेसी आदि मिसीसिपी­मिसौरी की सहायक नदियाँ यानी ट्रिव्यूटरी हैं।

टेनेसी नदी पर ही विश्व की सर्वप्रथम बहु­उद्देश्यीय नदी घाटी परियोजना, 1943 में बनकर तैयार हुई।

https://youtu.be/9TGSFZhgJmY

https://youtu.be/vT6v1iFn4hk