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The Devil's Temple – शैतान का मंदिर

Author: Divem Sharma
by Divem Sharma
Posted: Jul 17, 2026

भारत के पुराने मंदिरों के बारे में कई रहस्यमयी कहानियाँ सुनने को मिलती हैं। कुछ मंदिर अपनी प्राचीन वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध हैं, तो कुछ अपने चमत्कारों के लिए। लेकिन कुछ ऐसे भी मंदिर हैं जिनका नाम सुनते ही लोग रास्ता बदल लेते हैं। आज की real horror story in hindi एक ऐसे मंदिर की है जिसे लोग "शैतान का मंदिर" कहते हैं।

कहते हैं कि इस मंदिर में दिन के समय पूजा होती थी, लेकिन सूर्यास्त के बाद यहाँ कोई इंसान कदम नहीं रखता था। गाँव के बुजुर्गों का विश्वास था कि रात होते ही मंदिर किसी और दुनिया का दरवाज़ा बन जाता है।

एक भूला हुआ गाँव

उत्तराखंड के पहाड़ों के बीच बसा एक छोटा-सा गाँव था—भैरवगढ़।

गाँव की आबादी मुश्किल से दो सौ लोगों की थी।

गाँव से लगभग दो किलोमीटर दूर घने जंगल के बीच एक प्राचीन मंदिर बना हुआ था।

आज वह मंदिर पूरी तरह वीरान था।

टूटी हुई सीढ़ियाँ, दीवारों पर उगी काई और चारों ओर फैली खामोशी उसे और भी डरावना बना देती थी।

गाँव वालों का कहना था कि हर अमावस्या की रात मंदिर की घंटियाँ अपने आप बजने लगती हैं।

लेकिन मंदिर में कोई दिखाई नहीं देता।

जो भी जिज्ञासा में वहाँ गया...

वह या तो गायब हो गया या हमेशा के लिए अपनी मानसिक स्थिति खो बैठा।

आरव का फैसला

आरव एक डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर था।

उसे ऐसी जगहों की सच्चाई दुनिया के सामने लाना पसंद था।

जब उसने इस मंदिर की कहानी सुनी तो उसने तय किया कि वह पूरी रात मंदिर के अंदर बिताएगा।

गाँव पहुँचते ही उसने सरपंच से मंदिर के बारे में पूछा।

सरपंच ने कुछ देर उसकी तरफ देखा और फिर कहा,

"अगर रात में कोई साधु तुम्हें प्रसाद दे...

तो उसे कभी मत लेना।"

आरव मुस्कुरा दिया।

उसे लगा यह भी किसी लोककथा का हिस्सा होगा।

मंदिर की पहली झलक

रात के लगभग दस बजे वह मंदिर पहुँचा।

मुख्य द्वार आधा टूटा हुआ था।

जैसे ही उसने अंदर कदम रखा, अचानक तेज़ ठंडी हवा चलने लगी।

मंदिर के अंदर धूल की मोटी परत जमी हुई थी।

फिर भी बीच में रखा दीपक धीरे-धीरे जल रहा था।

यह देखकर आरव चौंक गया।

इतने वर्षों से बंद मंदिर में दीपक कैसे जल सकता था?

उसने कैमरा चालू किया और रिकॉर्डिंग शुरू कर दी।

शुरुआत में सब सामान्य दिखाई दिया।

लेकिन कुछ मिनट बाद कैमरे की स्क्रीन अपने आप धुंधली होने लगी।

जब उसने रिकॉर्डिंग चेक की तो पीछे एक काले कपड़ों वाला साधु कुछ सेकंड के लिए दिखाई दिया।

आरव तुरंत पीछे मुड़ा।

मंदिर खाली था।

उसने खुद को समझाया कि शायद यह कैमरे की कोई तकनीकी गड़बड़ी होगी।

लेकिन उसके मन में पहली बार डर पैदा हुआ।

उसे महसूस होने लगा कि यह किसी साधारण horror story in hindi जैसी घटना नहीं थी।

रहस्यमयी घंटियाँ

रात के ठीक बारह बजे...

बिना किसी के छुए मंदिर की सभी घंटियाँ एक साथ बजने लगीं।

टन...

टन...

टन...

आवाज़ इतनी तेज़ थी कि पूरा जंगल गूँज उठा।

आरव ने टॉर्च की रोशनी चारों ओर घुमाई।

अचानक उसे मंदिर के पिछले हिस्से में एक सफेद आकृति दिखाई दी।

वह धीरे-धीरे गर्भगृह की ओर जा रही थी।

आरव उसके पीछे चल पड़ा।

जैसे ही वह गर्भगृह के पास पहुँचा...

वहाँ कोई नहीं था।

लेकिन ज़मीन पर ताज़े पैरों के निशान बने हुए थे।

पत्थर की मूर्ति

गर्भगृह के बीचों-बीच एक विशाल काली मूर्ति रखी थी।

मूर्ति की आँखों पर लाल रंग का तिलक लगा था।

आरव ने जैसे ही उसकी फोटो लेने की कोशिश की...

कैमरे की फ्लैश अपने आप बंद हो गई।

उसी समय उसे लगा जैसे मूर्ति की आँखें उसकी तरफ घूम गई हों।

उसने दोबारा देखा।

सब सामान्य था।

लेकिन तभी पीछे से किसी ने बहुत धीरे से कहा—

"देर कर दी..."

आरव पलटा।

सामने वही साधु खड़ा था।

लंबे बाल...

सफेद दाढ़ी...

और पूरी तरह काली आँखें।

साधु मुस्कुराया और उसके हाथ में एक कटोरा बढ़ाते हुए बोला—

"प्रसाद लो..."

आरव को सरपंच की बात याद आ गई।

उसने कटोरा लेने से मना कर दिया।

साधु की मुस्कान अचानक गायब हो गई।

अगले ही पल वह हवा में धुएँ की तरह गायब हो गया।

मंदिर के नीचे का रास्ता

डर के बावजूद आरव ने मंदिर की तलाशी जारी रखी।

गर्भगृह के पीछे उसे पत्थर की सीढ़ियाँ दिखाई दीं जो नीचे तहखाने की ओर जाती थीं।

वह धीरे-धीरे नीचे उतरा।

तहखाने में दर्जनों पुराने दीपक रखे थे।

दीवारों पर अजीब प्रतीक बने हुए थे।

बीच में एक लकड़ी का संदूक रखा था।

उसने संदूक खोला।

अंदर एक बहुत पुरानी डायरी रखी थी।

डायरी के पहले पन्ने पर लिखा था—

"अगर यह पुस्तक तुम्हारे हाथ में है, तो समझ लो मंदिर ने तुम्हें स्वीकार कर लिया है।"

आरव की धड़कन तेज़ हो गई।

डायरी में लिखा था कि कई सौ साल पहले इस मंदिर में एक तांत्रिक ने अमर होने का अनुष्ठान किया था।

अनुष्ठान अधूरा रह गया।

तब से उसकी आत्मा हर अमावस्या को किसी नए इंसान की तलाश करती है।

कई लोग इस घटना को सिर्फ short horror story in hindi समझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं, लेकिन गाँव के लोग जानते थे कि यह श्राप आज भी खत्म नहीं हुआ।

लाल रोशनी

डायरी पढ़ते-पढ़ते अचानक पूरा तहखाना लाल रोशनी से भर गया।

दीवारों पर बने प्रतीक चमकने लगे।

संदूक अपने आप बंद हो गया।

और उसके ऊपर खून जैसे लाल अक्षरों में एक नाम उभर आया—

आरव

उसके पैरों के नीचे की ज़मीन काँपने लगी।

सीढ़ियों की तरफ जाने वाला रास्ता अपने आप बंद हो गया।

तभी उसी साधु की आवाज़ फिर सुनाई दी—

"अब लौटने का समय निकल चुका है..."

आरव ने टॉर्च उठाई और दूसरी दिशा में भागने लगा।

लेकिन तहखाने का हर रास्ता उसी मूर्ति के सामने जाकर खत्म हो रहा था।

यहीं से इस mystery story hindi का सबसे खतरनाक अध्याय शुरू हुआ।

आखिरी घंटी

आरव ने पूरी ताकत से मंदिर के बाहर भागने की कोशिश की।

जैसे ही वह मुख्य द्वार तक पहुँचा...

मंदिर की सबसे बड़ी घंटी अपने आप बज उठी।

आवाज़ इतनी तेज़ थी कि उसके कान सुन्न हो गए।

उसने पीछे मुड़कर देखा।

सैकड़ों काले साए मंदिर के अंदर खड़े उसे देख रहे थे।

बीच में वही साधु मुस्कुरा रहा था।

अगली सुबह गाँव वालों को मंदिर के बाहर सिर्फ आरव का कैमरा मिला।

उसकी रिकॉर्डिंग के आखिरी फ्रेम में मंदिर खाली नहीं था।

वहाँ दर्जनों लोग आरती कर रहे थे।

लेकिन उनमें से किसी का चेहरा इंसानों जैसा नहीं था।

आज भी भैरवगढ़ के लोग अमावस्या की रात उस मंदिर की तरफ नहीं जाते।

अगर कभी दूर जंगल से मंदिर की घंटी सुनाई दे, तो उसे सुनकर भी अनसुना कर देना।

क्योंकि कुछ जगहें सिर्फ डरावनी नहीं होतीं, वे अपने अगले मेहमान का इंतज़ार कर रही होती हैं। शायद यही वजह है कि लोग इसे केवल एक suspense story hindi नहीं, बल्कि एक ऐसा जीवित श्राप मानते हैं जिससे बच निकलना लगभग असंभव है.

पूरी कहानी पढ़ने के लिए यहाँ जाएँ:Unexpected stories.in

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Divem Sharma

Member since: May 08, 2026
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