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The Last Bus – रात की आखिरी बस
Posted: Aug 15, 2026
रात के करीब 12 बजे विकास बस स्टैंड पर अकेला खड़ा था।
उसे अपने गाँव जाना था, लेकिन आखिरी बस निकल चुकी थी।
पूरा बस स्टैंड खाली था।
तभी अचानक पीछे से बस के हॉर्न की आवाज़ आई।
विकास ने मुड़कर देखा।
एक पुरानी बस उसके सामने आकर रुकी।
उसके ऊपर लिखा था—
"रूट नंबर 17"
विकास ने ड्राइवर से पूछा—
"यह बस कहाँ जाएगी?"
ड्राइवर ने बिना उसकी तरफ देखे कहा—
"जहाँ तुम्हें जाना है।"
बस के अंदरविकास बस में चढ़ गया।
अंदर सिर्फ़ चार यात्री बैठे थे।
एक बूढ़ा आदमी।
एक महिला।
एक छोटा बच्चा।
और सबसे पीछे एक आदमी जो खिड़की से बाहर देख रहा था।
विकास उनके पास जाकर बैठ गया।
बस चल पड़ी।
कुछ मिनट बाद उसने टिकट मांगा।
कंडक्टर ने उसे टिकट दिया।
विकास ने टिकट देखा।
उस पर उसकी मंज़िल का नाम नहीं था।
उस पर सिर्फ़ लिखा था—
"आखिरी पड़ाव।"
अजीब रास्ताबस शहर से बाहर निकल चुकी थी।
विकास ने खिड़की से बाहर देखा।
उसे रास्ता बिल्कुल पहचान में नहीं आ रहा था।
उसने कंडक्टर से पूछा—
"हम किस रास्ते से जा रहे हैं?"
कंडक्टर ने कहा—
"पुराने रास्ते से।"
विकास ने पूछा—
"लेकिन यह सड़क तो बंद है।"
कंडक्टर मुस्कुराया।
"तुम्हारे लिए बंद है।"
विकास के शरीर में सिहरन दौड़ गई।
पहला स्टॉपबस एक सुनसान जगह पर रुकी।
कंडक्टर ने आवाज़ लगाई—
"रामलाल!"
पीछे बैठा बूढ़ा आदमी उठ गया।
वह बस से नीचे उतर गया।
विकास ने खिड़की से देखा।
बस फिर चल पड़ी।
कुछ देर बाद विकास ने पीछे देखा।
बूढ़े की सीट पर अब सिर्फ़ एक पुरानी टोपी पड़ी थी।
बाकी यात्री बिल्कुल शांत बैठे थे।
दूसरा स्टॉपकुछ देर बाद बस फिर रुकी।
इस बार कंडक्टर ने महिला का नाम पुकारा।
महिला बच्चे का हाथ पकड़कर नीचे उतर गई।
विकास ने बाहर देखा।
वहाँ कोई घर नहीं था।
सिर्फ़ एक पुराना पेड़ और उसके नीचे पत्थर की पट्टी।
उस पर महिला का नाम लिखा था।
विकास घबरा गया।
उसने कंडक्टर से पूछा—
"ये लोग कहाँ जा रहे हैं?"
कंडक्टर ने कहा—
"अपने घर।"
आखिरी यात्रीअब बस में सिर्फ़ विकास और पीछे बैठा आदमी थे।
विकास ने उससे पूछा—
"आप कहाँ जा रहे हैं?"
आदमी ने धीरे से उसकी तरफ देखा।
उसका चेहरा देखकर विकास की साँस रुक गई।
वह आदमी...
विकास खुद था।
बिल्कुल वही चेहरा।
वही कपड़े।
बस उसकी आँखें बहुत थकी हुई थीं।
उसने कहा—
"मैं भी यही सवाल कभी पूछ चुका हूँ।"
सचविकास सीट से उठकर ड्राइवर के पास गया।
"बस रोकिए!"
ड्राइवर ने कोई जवाब नहीं दिया।
विकास ने उसका कंधा पकड़कर उसे अपनी तरफ घुमाया।
ड्राइवर का चेहरा देखकर वह पीछे हट गया।
ड्राइवर का चेहरा...
था ही नहीं।
सिर्फ़ खाली अंधेरा था।
तभी स्पीकर से आवाज़ आई—
"आखिरी पड़ाव आ गया है।"
पुराना बस स्टैंडबस एक पुराने बस स्टैंड पर रुकी।
विकास नीचे उतरा।
सामने वही बस स्टैंड था जहाँ से वह कुछ देर पहले बस में चढ़ा था।
लेकिन सब कुछ बहुत पुराना था।
दीवार पर लगी तारीख़ देखकर उसके होश उड़ गए।
2004
उसी साल की तारीख़...
जिस दिन विकास के पिता की बस दुर्घटना में मृत्यु हुई थी।
आखिरी सचविकास ने पीछे देखा।
बस गायब थी।
सिर्फ़ सड़क पर एक पुरानी टिकट पड़ी थी।
उसने टिकट उठाया।
पीछे लिखा था—
"कुछ यात्राएँ घर जाने के लिए नहीं होतीं।"
अगली सुबह विकास को उसी पुराने बस स्टैंड के पास बेहोश पाया गया।
उसकी जेब में वही टिकट था।
पुलिस ने बताया कि उस रास्ते पर पिछले पंद्रह साल से कोई बस नहीं चलती।
लेकिन विकास के फोन में रात 12:17 से 1:03 तक एक वीडियो रिकॉर्ड हुआ था।
वीडियो में वही पुरानी बस दिखाई दे रही थी।
और आखिरी फ्रेम में...
विकास खिड़की के पास बैठा था।
उसके सामने उसका पिता बैठे थे।
आज भी उस सड़क से गुजरने वाले कुछ ड्राइवर बताते हैं कि आधी रात के बाद कभी-कभी एक पुरानी बस दिखाई देती है।
उसका रूट नंबर हमेशा 17 होता है।
कई लोग इसे एक real horror story in hindi मानते हैं, जबकि कुछ लोग इसे सड़क पर होने वाला भ्रम बताते हैं।
लेकिन स्थानीय बस ड्राइवरों की एक बात आज भी मशहूर है—
"रात में अगर रूट नंबर 17 की बस दिखे, तो उसे रोकना मत।"
क्योंकि शायद वह बस यात्रियों को उनकी मंज़िल तक नहीं ले जाती।
वह उन्हें...
उन जगहों तक ले जाती है जहाँ उन्हें दोबारा नहीं जाना चाहिए।
ऐसी horror story in hindi सुनने के बाद रात की आखिरी बस का इंतज़ार करने से पहले शायद आप भी आसपास एक बार जरूर देखेंगे।
और इंटरनेट पर मौजूद कई unexpected stories की तरह इस घटना का भी कोई पक्का जवाब नहीं है।
बस एक सवाल बचता है—
अगर वह बस आज भी चलती है, तो उसका अगला यात्री कौन होगा?
पूरी कहानी पढ़ने के लिए यहाँ जाएँ: Unexpected stories.in
About the Author
Exploring the world of horror, mystery, and suspense through engaging Hindi stories with unexpected twists and thrilling experiences.
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