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The Unclaimed Suitcase – स्टेशन पर पड़ा आखिरी सूटकेस

Author: Divant Sharma
by Divant Sharma
Posted: Oct 05, 2026

सुबह के 5 बजे नमन रेलवे स्टेशन पर अपनी ट्रेन का इंतज़ार कर रहा था।

प्लेटफॉर्म लगभग खाली था।

तभी उसकी नजर एक काले रंग के सूटकेस पर पड़ी।

वह अकेला पड़ा था।

न कोई मालिक।

न कोई पहचान।

नमन ने स्टेशन मास्टर को बताने के लिए सूटकेस उठाया।

उठाते ही उसे अंदर से हल्की-सी आवाज़ सुनाई दी।

टक... टक...

जैसे कोई अंदर से ढक्कन पर उंगली मार रहा हो।

नमन ने सूटकेस नीचे रख दिया।

स्टेशन मास्टर ने उसे देखा और अचानक गंभीर हो गया।

"इसे हाथ मत लगाना।"

नमन ने पूछा—

"क्यों?"

उसने कहा—

"यह सूटकेस हर सोमवार सुबह 5 बजे यहीं मिलता है।"

नमन हँसा।

"और हर बार इसका मालिक?"

"कभी नहीं मिला।"

स्टेशन मास्टर ने सूटकेस को पुराने स्टोर रूम में रखवा दिया।

लेकिन कुछ देर बाद नमन ने देखा...

सूटकेस फिर उसी प्लेटफॉर्म पर पड़ा था।

इस बार उस पर एक कागज़ चिपका था।

उस पर लिखा था—

"नमन के लिए।"

नमन का चेहरा सफेद पड़ गया।

उसने कागज़ हटाया।

अंदर कपड़े, कुछ पुरानी तस्वीरें और एक छोटी डायरी थी।

डायरी के पहले पन्ने पर लिखा था—

"अगर यह सूटकेस तुम्हें मिला है, तो अगली ट्रेन मत पकड़ना।"

नमन ने डायरी पढ़ना शुरू किया।

उसमें उसकी जिंदगी की बातें लिखी थीं।

उसकी नौकरी।

उसका घर।

उसकी माँ का नाम।

यहाँ तक कि उसकी आज की ट्रेन का नंबर भी।

आखिरी लाइन थी—

"ट्रेन 7:10 पर आएगी। उसमें मत बैठना।"

नमन ने फैसला किया कि वह ट्रेन नहीं पकड़ेगा।

7:10 पर ट्रेन प्लेटफॉर्म पर आई।

लोग चढ़ने लगे।

नमन दूर खड़ा रहा।

कुछ सेकंड बाद उसे अपनी सीट दिखाई दी।

खिड़की के पास एक आदमी बैठा था।

नमन ने ध्यान से देखा।

वह आदमी...

नमन जैसा ही दिख रहा था।

उसने ट्रेन से उतरकर प्लेटफॉर्म पर देखा।

दोनों की नजरें मिलीं।

ट्रेन चल पड़ी।

खिड़की के अंदर बैठा नमन धीरे-धीरे मुस्कुराया।

और हाथ में वही काला सूटकेस था।

नमन ने स्टेशन मास्टर से पूछा—

"वह कौन था?"

स्टेशन मास्टर ने जवाब नहीं दिया।

उसने सिर्फ़ एक पुरानी फाइल निकाली।

उसमें उसी ट्रेन का रिकॉर्ड था।

दस साल पहले उसी तारीख़ को ट्रेन दुर्घटनाग्रस्त हुई थी।

मृत यात्रियों की सूची में नमन का नाम भी था।

नमन ने काँपते हुए पूछा—

"लेकिन मैं तो..."

स्टेशन मास्टर ने धीरे से कहा—

"तुम दस साल से हर सोमवार यहाँ आ रहे हो।"

नमन ने पीछे देखा।

वह काला सूटकेस फिर प्लेटफॉर्म पर पड़ा था।

इस बार उसके ऊपर एक नई पर्ची थी—

"अगला सोमवार आखिरी होगा।"

इस घटना को कुछ लोग real horror story in hindi मानते हैं, लेकिन नमन के बारे में कोई वर्तमान रिकॉर्ड नहीं मिला।

कहा जाता है कि सोमवार की सुबह स्टेशन पर कभी-कभी एक आदमी दिखाई देता है जो काला सूटकेस लेकर प्लेटफॉर्म पर खड़ा रहता है।

ऐसी horror story in hindi का सबसे डरावना हिस्सा सूटकेस नहीं है।

डर यह है कि शायद कुछ लोग अपनी मौत के बाद भी अपनी आखिरी यात्रा पूरी करने के लिए उसी जगह लौटते रहते हैं।

और ऐसी unexpected stories में सबसे बड़ा सवाल यही रह जाता है—

अगर नमन पहले ही मर चुका था, तो उस सुबह प्लेटफॉर्म पर खड़ा नमन कौन था?

पूरी कहानी पढ़ने के लिए यहाँ जाएँ: Unexpected stories.in

About the Author

Exploring the world of horror, mystery, and suspense through engaging Hindi stories with unexpected twists and thrilling experiences.

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Divant Sharma

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